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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 56

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 56

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

प्राणन -वृत्ति ही प्राण-वायुओं का स्पन्द है । हे राघव, चूँकि वीतहव्य की देह में धारणा द्वारा उक्त प्राणन -वृत्ति के शान्त हो जाने पर वे प्राण पत्थर की नाई दृढ़ होकर स्थित थे, इसलिए मुनि की वह देह नष्ट नहीं हुई