Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 48
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
वैसा मन भले ही हो, उससे प्रकृत में क्या आया ? इस पर कहते हैं।
हे भद्र जो हिंसक जन्तुओं का मन है, वह जब राग, द्वेष एवं विषमता से रहित संवित् के (चैतन्य
के) विलास से नितान्त समन्वित योगी की देह मेँ गिरता हे, तब तत्काल ही योगी के चैतन्य की
समता का प्रतिबिम्ब पड़ने से मानों समता प्राप्त कर लेता है, इसलिए उनके द्वारा हिंसा की प्राप्ति
नहीं हो सकती