Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 42
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
देहाभिमान-वासना से विनिर्मुक्त
जीवन्मुक्त महात्मा की देह बाधित होने से अधिष्ठानभूत विशुद्ध संवित्-स्वरूप रहती है, अत: उसके
छेदन में कोई भी हिंसक प्राणी समर्थ नहीं होते, क्योकि 'अच्छेद्योड्यम अदाह्योऽयम अक्लेद्योऽशोष्य
एव च' (यह आत्मारूपा संवित् न छेद्य है, न दाह्य है, न क्लेद्य है और न शोष्य है) इत्यादि भगवान् का
वाक्य है