Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
द्विविधश्चित्तनाशोऽस्ति सरूपोऽरूप एव च ।
जीवन्मुक्तः सरूपः स्यादरूपो देहमुक्तिजः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाबाहो, यद्यपि आत्मा सर्वत्र व्यापक है, तथापि सुख-दुःखो की परम्परा से कभी भी वह
पराभूत नहीं होता, अतः आप निरर्थक क्यों शोक कर रहे हैं ?