Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
आपत्कार्पण्यमुत्साहो मदो मान्द्यं महोत्सवः ।
यं नयन्ति न वैरूप्यं तस्य नष्टं विदुर्मनः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
संसार में जो कोई भी पदार्थ हैं, उन सबको आत्मज्ञ अविद्यामय ही
मानते हैं, इसलिए अविद्या से वर्जित तत्त्वज्ञ उनमें कैसे डूब सकता है