Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
चेतसः कथिता सत्ता मया रघुकुलोद्वह ।
अस्य नाशमिदानीं त्वं श्रृणु प्रश्नविदां वर ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी,
जो चित्र विचित्र आकाशगमन आदि क्रियाकलाप दिखाई पड़ता है या प्रमाण से उपलब्ध होता है, वह
तत्-तत् योनियों में उत्पन्न देह का स्वभाव है, क्योकि मच्छर आदि में भी आकाशगमन शक्ति दिखाई
पड़ती है। इसलिए वह आत्मतत्त्वज्ञों को वांछित नहीं है