Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, Verse 43
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
नीलोत्पलालिनयनाः परमप्रेमभूषणाः ।
हासायैव विलासिन्यः क्षणभङ्गितया स्थिताः ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
नीलकमल के तुल्य मनोहर ओर भ्रमर के तुल्य चंचल नेत्रवाली,
अतिशय प्रीतिरूप भूषण से युक्त (अत्यन्त अनुरागवाली) स्त्रियाँ भी क्षणमात्र में विनाशी होने के
कारण उपहास के ही योग्य हैं