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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, Verse 41

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 41

संस्कृत श्लोक

सतोऽसत्ता स्थिता मूर्ध्नि मूर्ध्नि रम्येष्वरम्यता । सुखेषु मूर्ध्नि दुःखानि किमेकं संश्रयाम्यहम् ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

विनाशी एवं दुःखमिश्रित होने के कारण सम्पूर्ण दृश्य की अभद्रता दिखलाते है । वर्तमानकालिक दृश्य के सिर पर विनाश, मनोहर पदार्थो के सिर पर अरम्यता एवं सुखों के सिर पर दुःख विद्यमान हैं । यानी वर्तमानकालिक दृश्य, मनोहर पदार्थ ओर सुख ये सभी क्रमशः विनाश, अरम्यता ओर दुःख से व्याप्त है । भला कौन ऐसी मुक्त वस्तु है, जिसका मैं आश्रय करूँ