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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 60

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 60

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण कार्यो की परम्परा से शून्य,समस्त दृश्यों की अवस्था को अतिक्रमण कर स्थिति रखनेवाला, दीर्घ उच्चारित प्रणव की ब्रह्मरन्ध्र मे विश्रान्ति का अनुसरण कर ब्रह्माकारता की प्राप्ति से उपरत बुद्धि तथा प्रारब् से प्रतिबद्ध अवशिष्ट अविद्यारूपी मल से रहित यह मैं पूर्णरूप से अवस्थित हूँ