Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 49
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
हे देह,
तुम्हारे मल, दुर्गध, स्वेद आदि के द्वारा दूषित हो जाने के कारण हुए जो जलके अपराध हैं, उनके
प्रकार-विशेष-स्वरूप तुम्हारी विशुद्धि का सम्पादन करनेवाले स्नानरूप उपायों को भी मेँ प्रणाम
करता हूँ तथा तुम्हारे भोजन, अलंकरण आदि व्यवहारो को एवं भोजनादि सामग्री के सम्पादन के लिए
इतस्ततः दौडधूप करने की प्रवृत्तियों को मे प्रणाम करता हूँ