Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 47

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 47

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

अब दण्डकाष्ठ के गुणोका वर्णन कर उसको नमस्कार करते है । कुत्ते, सर्प आदि से होनेवाले भयो में, विषम प्रदेशों मे तथा गड्ढे और कुजो मेँ हाथ को अवलम्बन देनेवाला, वृद्धावस्था के एकमात्र मित्र दण्डरूप काष्ठ तुम्हें मैं प्रणाम करता हूँ