Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
भो भो इन्द्रियचौरा हे हताशा हतनामकाः ।
युष्माकं नायमात्मास्ति न भवन्तस्तथात्मनः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
उद्धार करने के लिए आकाश में स्थित सूर्य के शरीर में मैं उस प्रकार प्रवेश करता हूँ, जिस प्रकार दर्पण
में प्रतिबिम्ब