Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
वस्तु नाभिननन्दासौ निनिन्द न कदाचन ।
न जगाम तथोद्वेगं न च हर्षमवाप सः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
उनकी दूसरी चिन्ता बतलाते हैं।
अथवा इस प्रपंच से मेरा क्या प्रयोजन है ? मैं इस शरीर से निर्विघ्नतापूर्वक विदेह मुक्ति के द्वारा
शान्त हो जाता हू । मैं निर्वाण को प्राप्त कर लेता हूँ । अपने पद को जाता ह । देह लीला से मेरा कौन
प्रयोजन है ?