Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
वस्तुतस्तु न तद्राम जगन्नैवं न चेतरत् ।
तवापि न जगत्सत्ता ब्रह्मेदं भाति केवलम् ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
हे साधो, तुम्हारे परिच्छिन्न रहने पर भी विचार के दृढ़ होने पर सुख की सिद्धि के लिए तुम्हारा
चारों ओर से यह विनाश प्राप्त हुआ