Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
सर्वात्मिकैषा चिच्छक्तिर्यत्रोदेति यथा यथा ।
तथा तत्राशु भवति तथात्मैकस्वभावतः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञान का विनाश हो जाने पर आत्माकार वृत्तिर्या भीतर
से पूर्णता के सम्पादक विकास को प्राप्त करती है ओर उससे समग्र चराचरयुक्त जगत् बाधित होकर
केवल संविदंशमात्र मेँ विश्रान्त हो जाता हे