Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
संविदेवास्य तं देहं जग्राहोर्वीनिपीडितम् ।
तनुः प्राणमयस्पन्दः प्राणसंसरणं विना ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
सबको आनन्द देनेवाली, शान्त, परम पवित्र (सब भूतो मे) मैत्री हृदय
में ऐसे उत्पन्न होती है, जैसे तरुवर में मनोहर मंजरी उत्पन्न होती हे