Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
प्रमत्तशरभास्फोटैर्भूकम्पतटघट्टनैः ।
वनदाहधमध्वानैर्जलौघाहतिवल्गनैः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
अपवित्र, दुष्ट आचरण
करनेवाला कामरूपी कर्कश मुर्गा राग आदि वासनाओं से व्याप्त मनरूपी कूड़े के ढेर को इधर-उधर
विस्तृत कर देता है यानी बार-बार अपने पैरों से फैला देता है