Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 81

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 81 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 81

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे चित्त, जैसे आकाश में अरण्य नहीं है, वैसे ही पूर्वोक्त सत्‌ कल्पनाएँ आत्मा में हैं ही नहीं, संवेद्य से वर्जित केवल संवित्‌ ही इस जगत्‌ के रूप में विस्तृत हुई है, इसलिए उसमें यह मैं हूँ, यह अन्य है" इस प्रकार की असत्‌ कल्पनाओं का अवसर ही कैसे हो सकता है ?