Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 70
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 70 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 70
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
सम्बन्ध की अयोग्यता का उपपादन करने के लिए मुख्य सम्बन्ध का लक्षण कहते हैं ।
हे चित्त, एक पदार्थ की क्रिया से या उभय पदार्थों की क्रियाओं से एक पदार्थ के दूसरे पदार्थ मे मिल
जाने से एक का दूसरे में जो अन्तर्भाव हो जाता है या उस अन्तर्भाव से जो ऐक्य हो जाता है, वही
सम्बन्धफलतः लक्षण है, यों सम्बन्धलक्षण विद्वानों के द्वारा कहा गया है। वैसा सम्बन्ध द्वैतावस्था में ही
हो सकता है,पर अब द्वित है नहीं, किन्तु अद्वैत है, अतः सम्बन्ध कैसे २