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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 46

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 46

संस्कृत श्लोक

स्फुरच्चिदेव बोधात्मा सर्वत्राहं स्थितः सदा । अयमात्मेति कलना मन्ये नो निर्मलान्तरे ॥ ४६ ॥

हिन्दी अर्थ

इससे तुम तत्त्व रहित हो, तुम मूढ हो ओर परमार्थ दशा में तुम्हारा अस्तित्व ही नहीं है । इसलिए तुम्हे “मैं तत्स्वरूप हीं हूँ” ऐसा निरर्थक तादात्म्य अध्यास, जन्म आदि दुःख के लिए, मत होवे