Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
आलोकः स्फुटतामन्तरायात्यज्ञानसंक्षये ।
प्रशाम्यत्यम्बुदे व्योम्नि शरदीवार्कमण्डलम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
अनृत (असत्य) स्वरूपवाले आप लोगों की दुर्विनय से आत्मज्ञानशून्य कुमार्ग मे जो प्रवृत्ति है, वह
अन्धों की ही उपमा के लिए हो सकती है यानी अमार्ग मेँ दौड रहे अन्धों के कूप-पतन की उपमा हो
सकती है, यह भाव है