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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 10

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

कल्लोलव्यालवलिते शरीरश्वभ्रकोटरे । घननीहारखे स्वान्तश्चिन्ताचपलमर्कटी ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे सायंकाल के समय मेरुपर्वत की कन्दरा मे प्रवेश कर रहा भानु अपनी दीप्तिकिरणों का अपने में उपसंहार कर लेता है, वैसे ही महामुनि वीतहव्य ने इन्द्रियालोकरूपी कारण से दिशाओं में बिखरे हुए मन का उसके निग्रह के उपायों से धीरे-धीरे यानी आगे कहे जानेवाले प्रबोधन से अपने हृदय मे उपसंहार कर लिया