Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 48
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
पर्वत,
समुद्र, पृथ्वी, नदी इनसे युक्त प्रसिद्ध यह वर्तमान दृश्य श्री मद्रूप है ही नहीं, इसी प्रकार अतीत,
अनागत पदार्थो से परिपूर्ण यह जगत् भी मद्रूप है ही नहीं अथवा उक्त सभी मद्रूप ही है, ऐसे मद्रूप
प्रत्यगात्मा को बार-बार नमस्कार है