Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verses 41–42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, verses 41–42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 41
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
मुझे न तो शोक है और न मोह है न में अहम्अभिमान प्रधान जड़-
अंशस्वरूप ही स्वयं हूँ। मैं अहंकार यानी प्रत्यक् चिदात्मस्वरूप नहीं हूँ, ऐसा नहीं हे, किन्तु प्रत्यक्-
चैतन्यस्वरूप ह । मैं भेद का आश्रय नहीं हूँ यानी अद्वितीय हूँ। मद्रूप ही आत्मा को बार-बार नमस्कार
करता हूँ