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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 29

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे चित्त, मनुष्यों के बीच में मरनेवाले देह में आत्मबुद्धि रखनेवाले स्वतः मृत मनुष्य के प्रति यदि तुम गरजते हो तो तुम्हारा क्या पराक्रम है, क्या बल है ओर क्या समाश्रय है ? यदि एक अद्वितीय आत्मतत्त्वस्वरूप को समझनेवाले मेरे प्रति आकर तुम गरजो, तो मैं तुम्हारा पराक्रम, बल ओर समाश्रय समझूँ