Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
मनःकल्पनया ह्येते सुसंबद्धाः परस्परम् ।
रूपालोकमनस्कारा दारुणी जतुना यथा ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, आदि और अन्त में अविनाशी, पूर्णं शान्त
जो स्वरूप है, वही प्रसिद्ध आत्मरूपत्व है, चूँकि आत्मा का वैसा स्वरूप है, इसलिए आप उसी स्वरूपवाले
हो जाइए