Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 8, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 8, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
अन्ये ऊचुः ।
उपशमसुखमाहरेत्पवित्रं सुशमवतः शममेति साधुचेतः ।
प्रशमितमनसः स्वके स्वरूपे भवति सुखे स्थितिरुत्तमा चिराय ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
औरों ने कहा : पवित्र उपशम सुख को प्राप्त करे शमवान पुरुष का विशुद्ध चित्त शान्ति
को प्राप्त होता है । जिस पुरुष का चित्त उपशम को प्राप्त हो गया, उसकी निरतिशय सुखरूप अपने
स्वरूप में चिरकाल तक उत्तम स्थिति होती है