Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 32
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 32
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : ब्रह्मन्, इस जगत् में प्राणियों का वह हृदय क्या है ? महाआदर्शस्वरूप
जिसमें यह सब, दर्पण मे प्रतिबिम्ब की नाई, स्फुरित होता है हृदय शब्द का तीन जगह प्रयोग होता है
एक तो पुण्डरीकाकार मांसखण्ड में, दूसरा मन में और तीसरा परमात्मा में । इन विभिन्न स्थानों में
प्रयोग होने के कारण सन्देह को प्राप्त हुए भगवान् का प्रश्न उचित ही है