Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
समस्तकलनोन्मुक्ते न किंचिन्नामसूक्ष्मखे ।
ध्यानात्संविदि लीनायां प्राणस्पन्दो निरुद्ध्यते ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
देश और काल के अनुसार प्राप्त हुए क्रियाकलापों
एवं तत्-तत् कार्यों में स्थित हुआ भी वह कामनाओं से जनित सुख ओर दुःखों से तनिक भी अभिभूत
नहीं होता