Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
कुम्भके कुम्भवत्कालमनन्तं परितिष्ठति ।
अभ्यासात्स्तम्भिते प्राणे प्राणस्पन्दो निरुद्ध्यते ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसका पुनर्जन्म मन्द हो गया है,
ऐसा आनन्द-सागर में निमग्न तत्त्ववेत्ता, घूर्णमान शराबी की नाई, अनुपादेय बुद्धि से कृत का (किये
गये कर्मो का) ओर अकृत का स्मरण नहीं करता, क्योकि अनुपादेय बुद्धि से उसकी नियमतः कृताकृत
की स्मारक क्रियाफलोपादेयता-बुद्धि नष्ट हो गई हे