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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 22

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

रेचके नूनमभ्यस्ते प्राणे स्फारे खमागते । न स्पृशत्यङ्गरन्ध्राणि प्राणस्पन्दो निरुद्ध्यते ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसका अन्तःकरण भ्रान्ति से विनिर्मुक्त होकर ब्रह्मस्वरूप हो गया हो, वह आकाश की नाई सभी दृष्टियों मे न अस्त को प्राप्त होता है ओर न उदय को प्राप्त होता है