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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 77, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 77, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 77 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

प्रवृत्तवाक्पुण्यकथो दैन्याद्व्यपगताशयः । धीरधीरुदितानन्दः पेशलः पुण्यकीर्तनः ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, आर्य यानी बड़े-बड़े तत्त्वज्ञो के साथ ब्रह्म का विचारकर तथा वैसी बुद्धि से संसार- सागर का अवलोकन कर तदनन्तर यानी तत्त्वज्ञान के अनन्तर ब्रह्मरूपता को प्राप्त हुए जगत्‌ में क्रीडा शोभित होती है, अन्यथा नहीं