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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

बलं बुद्धिश्च तेजश्च दृष्टतत्त्वस्य वर्धते । सवसन्तस्य वृक्षस्य सौन्दर्याद्या गुणा इव ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

जिसकी विचित्र दुरवगाह बुद्धि थी यानी साधारण बुद्धिवाले लोग जिन पदार्थों को समझ नहीं सकते उन पदार्थो को शीघ्र समझ लेने की तीव्रातितीव्र बुद्धि जिसमें थी और जो वीर था, ऐसे ज्ञानरूपी रत्न के एकमात्र समुद्र स्वामी कातिकिय ने मुक्त होते हुए भी तारकासुर आदियों से रण क्रीडा की