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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 14

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

अपारावारमाक्रम्य प्रमेयीकृत्य सर्वतः । संसाराब्धिं गाहते यः स एव पुरुषः स्मृतः ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

आकाशतल में चमकनेवाले, विद्वान तथा नीतिशास्त्र रचना के द्वारा समस्त अभिमत अर्थो का परिपालन करनेवाले असुरदेशिक शुक्राचार्य निर्विकार बुद्धि होकर ही काल बिताते हैं