Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 90
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, verse 90 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 90
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
उसमें भी जो तत्त्वज्ञ सप्तम भूमिका में आरूढ़ है, उसकी अत्यन्त स्थिरता रहती है, ऐसा कहते हैं ।
हे श्रीरामजी, सप्तम भूमिका में समारूढ़ योगी छिन्नांग हुआ भी छेदित नहीं होता, गिर रहे अश्रुओं
से युक्त होता हुआ भी रोता नहीं है, दग्ध होता हुआ भी दग्ध नहीं होता, विनष्ट देह होता हुआ भी नष्ट
नहीं होता