Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verses 67–68
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, verses 67–68 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 67
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
अनेक भुवनो को उत्पन्न कर रहे अपनी आत्मा में परम विश्रान्ति लेनेवाले
हिरण्यगर्भ की ही नाई तत्-तत् कालोचित क्रियाओं में व्याप्त होने पर भी देहादियुक्त तत्त्ववेत्ता किसी
प्रकार से विक्षेप से युक्त नहीं रहता यानी विक्षेपशून्य ही रहता है