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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 65

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, verse 65 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 65

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

जैसे दो वीचियाँ शेलेन्द्र मन्दराचल को क्षोभ नहीं पहुँचा सकती, वैसे ही जिसने प्रत्यक्‌ -दृष्टि के मार्ग का भली प्रकार परिज्ञान कर लिया है, ऐसे तत्त्वज्ञ महापुरुष को सुख-बुद्धि और दुःख बुद्धि दोनों तनिक भी क्षोभ नहीं पहुँचा सकती