Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 63
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, verse 63 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 63
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
तब क्या विद्रान् खाना, पीना आदि का परित्याग कर देता है ? तो इस पर कहते हैं ।
हे श्रीरामजी, जैसे लोचन आसक्त न होकर आलोक का उपभोग करता है वैसे ही जिसका अन्तःकरण
किन्हीं भोग्य पदार्थोमिं आसक्त नहीं है ऐसा तत्त्वज्ञ मुनि अयत्न से प्राप्त अनिषिद्ध अन्न, पान आदि सब
भोग्यजात का केवल देहमात्र के धारण के अनुकूल चेष्टा से (व्यापार से) उपभोग करता है