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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 40

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

ये वज्रसाराः सुदृढा दृश्यन्ते ते क्षयं गताः । कल्पस्यान्ते यथेन्द्वर्कधराब्धिविबुधादयः ॥ ४० ॥

हिन्दी अर्थ

अभिलाषा के परित्याग की प्रशसा करते हैं । हे श्रीरामभद्र, जिस प्रकार चन्द्र-बिम्ब की नाई अत्यन्त शीतल नैराश्य अपने अन्तरात्मा को सुख- शान्ति पहुँचाता है, उस प्रकार अंग मेँ आलिंगित वरवर्णिनी (अपने पति में अनन्य भाव रखनेवाली अति कमनीय कान्ता) पुरुष के अन्तरात्मा को सुख-शान्ति नहीं पहुँचाती है