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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 25

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

अन्येऽप्यस्मिंस्त्रिभुवने यक्षासुरनराः सुराः । शतशो मुक्ततां याताः सन्तस्तिष्ठन्तिसंसृतौ ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे मर्यादापुरुषोत्तम, जैसे वृष्टि से धोया गया पर्वत परम शीतलता को प्राप्त करता हैं, वैसे ही उक्त देहाभिमान का विनाश हो जाने पर पुरुष निरतिशय शीतलता को प्राप्त करता है । जैसे राज्य मिल जाने पर दरिद्र परम विश्रान्ति को धारण करता है, वैसे ही वह परम विश्रान्ति को धारण करता है