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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 35

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

प्राप्तानुत्तमविश्रान्तिर्लब्धालभ्यपरास्पदः । अनिवृत्तिपदं प्राप्तो मनसा कर्मणा गिरा ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

मोक्ष न तो आकाश की पीठ के ऊपर है, न तो पाताल में है और न भूमि के तल पर है, किन्तु सम्यक्‌ ज्ञान से चिन्मात्र- स्वरूपता को प्राप्त निर्मल चित्त ही मोक्ष है