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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 30

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

अन्तर्दीपो घट इव मध्यज्वाल इवानलः । स्फुरद्दीप्तिर्मणिरिव प्रयात्यन्तः प्रकाशताम् ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

प्रबोध होने पर आत्मा किस प्रकार का रहता है ? उसे कहते है । यह आत्मा कभी भी उत्पन्न नहीं हुआ, क्योकि इसका कोई आदि कारण नहीं है, और यह नष्ट भी नहीं होता क्योकि उसकी उत्पत्ति नहीं हुई है । वह आत्मभिन्न वस्तु की कभी भी अभिलाषा नहीं करता है, क्योकि आत्मा से भिन्न कोई वस्तु है ही नहीं