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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

परं धैर्यमुपादत्ते स्थैर्यं मेरुरिवाचलः । राजते स्वच्छया लक्ष्म्या शान्तेन्धन इवानलः ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

तब आत्मा का स्वाभाविक स्वरूप कैसा है ? तो उस पर कहते हैं। सबका यह आत्मा किसी समय न तो उत्पन्न होता है, न मरता है, न कुछ ग्रहण करता है, न कुछ चाहता है, न मुक्त होता है और न बद्ध होता है