Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तद्वशादियमायाता महती मेदुरोदरा ।
माया मदमहाशक्तिः सुरास्वादलवादिव ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
सर्वत्र अहंभाव-द्ृष्टि को बतलाने के लिए उपक्रम करते है ।
हे श्रीरामजी, अब आप इस द्वितीय दृष्टि का श्रवण कीजिये, इसका श्रवण करने से आप अविचल
अपने आत्मा का साक्षात्कार कर लेंगे और दिव्य दृष्टि से सम्पन्न हो जायेंगे