Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
चित्सर्वव्यापिनी सूक्ष्मा न चला नैव चाल्यते ।
न स्वतः स्पन्दमायाति देवाचल इवानिलैः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
यद्यपि आत्मा शोधन द्वारा अखिल प्रपंच स्वरूप से निर्मुक्त तथा
बाध के द्वारा समस्त पदार्थो की सत्ता का अतिक्रमण करनेवाला है; तथापि जगत् के बोध स्वरूप उपाय
के द्वारा निखिल जगत् को पूर्ण करनेवाला सबका प्रकाशक यह आत्मा हे