Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
वायुः स्पन्दनधर्मत्वाद्यदा चलति देहके ।
तदा स्फुरति हस्ताङ्गरसनापल्लवावली ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे पापशून्य रामजी, इन दो से पृथक् एक तीसरी अहंकारदृष्टि स्वभावतः ही , न कि
शास्त्रतः चली आ रही हे । इसका स्वरूप है -"देह मैं हू । इस दृष्टि को आप केवल दुःखदायक ही
जानिये, न कि विश्रान्तिदायक