Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
किं तज्ज्ञव्यतिरेकेण विद्यते यदुपागतम् ।
हर्षमेतु विषादं वा विषादे ज्ञो जगन्मयः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे एक ही वृक्ष से विलक्षण विलक्षण पुतलियाँ (भीतियाँ) बनाई जाती हैं, वैसे ही पाँचभूतों के
संघात से विभिन्न विभिन्न जनसमूह बनाये गये हैं