Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
सर्वातीतस्वरूपोऽपि सर्वसत्तातिगोऽपि च ।
असत्तापूरितजगदस्त्येवात्मा प्रकाशकः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
भाई आदि में राग का निवारण करते हैं।
जैसे एक पत्थर से उत्पन्न हुई दो पाषाण-प्रतिमाओं के परस्पर आलिंगित होने पर भी राग नहीं
होता, वैसे ही चित्त और शरीर के आलिंगित होने पर भी राग नहीं होता