Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
न कूलकाष्ठैर्जलधिर्न रजोभिर्नभस्तलम् ।
न म्लायति निजैर्लोकव्यवहारैरिहात्मवान् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
पूवोक्त रीति से द्वैत को सत्य मानने पर भी जब आत्मा के साथ देहादि का सम्बन्ध नहीं हो सकता,
तब उसको असत्य मानने पर आत्मा के साथ देह आदि का सम्बन्ध नहीं है, इसमें तो कहना ही क्या ?
यों प्रौिवाद का उपसंहार कर रहे श्रीवसिष्ठजी कहते हैं।
हे धीमन्, जब द्वैत की सत्यता मानने पर भी आत्मा के साथ (पूर्वोक्त प्रणाली से) देहादि का
सम्बन्ध नहीं हो सकता, तब द्वैत की असत्यता में इस प्रकार सम्बन्ध की कल्पना ही कैसे हो सकती है,
अर्थात् नहीं हो सकती, यह भाव है