Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
न द्वित्वमस्ति नो देहाः संबन्धो न च तैः स्थितः ।
संभाव्यते कलङ्को वा भानोरिव तमःपटैः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे अनघ, सुषुप्ति की विकारशून्य
वृत्ति का अवलम्बन लेकर आप वर्णाश्रम-स्वभाव के अनुसार प्रारब्ध परिपाक से प्राप्त हुए लौकिक या
शास्त्रीय कर्मो का चाहे अनुष्ठान करिये चाहे मत करिये, उससे कुछ होनेवाला नहीं हे